Wednesday, March 25, 2009

चांदनी

आसमाँमे जगमगाती चांदनियाँ हो हजार,
हर दिल को क्यों रहे बस चांद काही इंतजार?

चांद का क्या कहना? कभी वह आए
तो कभी यूं ही चला जाए
फिर भी यह समाँ बना रहेगा
और आसमाँ चमकता रहेगा

रात के घने अंधेरोंको चांद भलेही दूर करे,
अपनी रोशनी पे वह क्यों इतना गुरुर करे?

हमने भी एक शाम गुजारी थी
किसी चांद के साए में
पर अब रात रोशन रहे
बस यादोंके दिये में

ऐ मेरे दोस्त, नामुमकिन हो ऐसी
इस जहाँ में कोई बात नही
मगर ये ना भूलना कभी
के हर जिंदगी एक रात नही..

1 comments:

संचिता सिन्हा said...

अरे, हमें तो पता ही नही था, आप हिंदी में भी काफी अच्छा लिखती हो| यह ब्लॉग पहले क्यों नही दिखाया? Janhavee, try in Hindi as well, you'll make a good asset for Hindi Channel as well..