Tuesday, October 10, 2006

इतनी मौते देखली, के जिंदगीसे डर गए
अपनोंको उसने मारा,
और हम जिंदा रहकर मर गए...

मौतको तो हम समझ न पाए
हमसे क्या ऐसी खता हो गयी ?
अपनोंको जो बचा न पाए,
हमसे हैं जिंदगी खफा हो गयी...

कही फिर मौत को जिंदगीसे इकरार हो न जाए

और हमें फिर जिंदगीसे प्यार हो न जाए...

(Written on December 30th, 2004- After the Indian Ocean Tsunami)